शहीद हुए तीन भाई लोग | The story of three brothers martyred

 शहीद हुए तीन भाई लोग | The story of three brothers martyred


 “पर हम बहुत चाहते हैं, कि तुम में से हर एक जन अन्त तक पूरी"

आशा के लिये ऐसा ही प्रयत्न करता रहे।"

पाठ का उद्देश्य :

सुसमाचार के लिये अपने जीवन को दिये गये विश्वासियों के बारे में सीखने के लिये और विश्वास की रक्षा के लिये मसीह के पीछे चलने वालों के बारे में बच्चों को सिखाने के लिये कि उसकी कीमत कितनी बड़ी है।

प्रस्तावना :

सर्वशक्तिमान परमेश्वर मनुष्य के प्रति अपना प्रेम कलवरी के क्रूस में प्रकट किया। मनुष्य के प्रेम करते समय संसार के लिये जो क्रूस अपमान का विषय था जो परमेश्वर के लिये अपमान नहीं था। जब एक व्यक्ति कहता है कि मैं मसीह का अनुयायी हूँ तो वह मसीह के प्रति कोई भी त्याग करने के लिये तैयार होता है। अपने जीवन के द्वारा यह बात प्रकट किये गये तीन भाईयों का अनुभव इस पाठ के द्वारा हम सीखने जा रहे हैं। 

विवरण :

मैक्सिमिनस तरसूस किलिकी नाम स्थान का राज्यपाल था। उसके शासन काल में मसीही लोग बहुत अधिक परेशानियों के बीच में से होकर गये। मैक्सिमिनस मसीही विरोधी होने की जानकारी पाकर उस देश का एक अधिकारी राज्यपाल को खुश करने के लिये एक बार तीन मसीहियों को बान्ध कर उसके पास ले आए। उस अधिकारी का नाम दमयोस था।

राज्यपाल ने पहले खड़े डार्कस से पृष्ठा तू कौन है। डार्कस जब बोला कि मैं एक मसीही हूँ तो राज्यपाल को गुस्सा आया। फिर भी वह प्रेमभाव से इस प्रकार बोला: "यदि तू परमेश्वर को इनकार करे तो तुझे रुपया और सम्मान आदि दिया जायेगा। इतना ही नहीं, बादशाह भी ऐसा करता है। "

डार्कस ने राज्यपाल से कहा रुपये का लोभ पाप है और उसके कारण पाप और धोखा, चोरी इतना ही नहीं खून भी होता है। लेकिन मसीही विश्वासियों को आनन्द और शान्ती है। इतना ही नहीं मसीही नाम से बढ़कर उसको कोई इच्छा नहीं और राज्यपाल से कहा आत्मा के ज्ञान न होने के कारण बादशाह लोग अन्य देवी-देवताओं की आराधना करने से वे नरक की ओर जाते हैं जो शैतान का हक है।

यह उत्तर पाकर बादशाह ने उस मसीही भक्त को कठोर तरीके से मारने के लिये आज्ञा दी। सिपाही लोग उसको डंडे से कठोर रूप में मारा और उसका जबड़ा मारकर तोड़ दिया। उन सबसे वे तृप्त वे नहीं हुए और वे उसे कोड़े से मारने लगे और उसकी हड्डियां दिखने लगी और उसे बान्धकर जेल में बन्द कर दिया। उसके बाद अन्य दो लोगों का न्याय शुरू हो गया।

दूसरा व्यक्ति प्रोबस को मैक्सिमिनस के पास लेकर आया। उससे पूछने पर उसने अपने भाई के समान उत्तर दिया कि वह एक मसीही है। इस कारण उसको भी भयंकर कूर तरीके से सताया। क्रूरतम तरीके से मार खाने के कारण प्रोबस के शरीर से खून की धार बहने लगी। तब पास खड़े दमत्रियोस ने उसके शरीर से बहने वाले खून को देखा तौभी कहा एक बार देवता को दण्डवत कर लो। एक बार मसीह को इनकार करने से बच सकता है। इस आज्ञा के सामने प्रोबस केवल एक बार सिर ही हिलाया। इस पर कोधित राज्यपाल ने कहा उसका चेहरा देखने योग्य घुमा कर बान्ध दो, देखें कि वह कैसे सहन करता है। आगे की सारी पिटाई छाती में था। लेकिन किसी प्रकार के बदलाहट से वह सब उसने आनन्द के साथ सह लिया। इतना ही नहीं, वह यह भी घोषणा की कि जितना वह शरीर में सताव का सामना कर रहा है उतना ही वह आत्मा में बल हासिल कर रहा है। सिपाही लोग उसको भी जंजीरों से बान्धकर जेल में डाल दिया।

तीसरी बार अन्डोनिकस को ले आया। फिर से राज्यपाल ने वही प्रश्न पूछा। अन्य दो जनों के समान यह भी दिलेरी के साथ उत्तर दिया। अन्य दो लोगों को दिये गये दण्ड की प्रक्रिया इसको भी दी गई। बहुत ही हिम्मत और आशा और आनन्द के साथ वह यह सब सहन कर लिया। उन लोगों ने उसको भी जेल में बन्द कर दिया। कुछ दिन के बाद तीनों को बाहर ले आए। उनके विश्वास बढ़ते हुए देखकर राज्यपाल का कोच भड़क उठा और उसने दण्ड को कठोर कर दिया। डार्कस के हथेली में अंगार रख कर बान्ध दिया। उसके पश्चात् गीले भूसे के ऊपर जो धुर्वे के साथ जल रहा था, उलटा लटका दिया। वह जलते आग के ऊपर यातना सहता हुआ डार्कस इस प्रकार कहा, “तुम अपनी सारी शक्ति मुझ पर प्रयोग करो तो भी तुम लोगों को या बादशाह को और तुम्हारे आराधना करने वाले देवताओं को दण्डवत नहीं करूंगा, जीवित परमेश्वर से मुझको तुम अलग नहीं कर सकते।"

उसके पश्चात् प्रोबस से राज्यपाल ने पूछा क्या तुम बलिदान बढ़ा सकते हो। "मसीह के विश्वास के लिये कष्ट सहने के लिये पहले के बजाय में शक्तिशाली हूँ उसने उत्तर दिया। उसके बाद प्रोबस को भी सिपाहियों ने कोड़े मारे। जलते हुए लोहे के सरिये उसके शरीर में र दिया। वापस कारागृह में बन्द भी कर दिया।

अन्डोनिकस को भी वे लोग राज्यपाल के सामने किये। राज्यपाल ने एक झूठ बोला और कहा कि मसीह को इनकार करके उच्च पद को प्राप्त किये गये तुम्हारे भाइयों के समान तुम मी मसीह का इनकार कर दो। यह सुनकर अन्डोनिकस इस प्रकार बताया, "हि राज्यपाल मेरे वीर भाइयों के ऊपर कमजोरी लगाने वाले आप की चालाकी भरे शब्दों में में लौटने के बारे में न सोचकर तुम लोग भयभीत करने वाले कार्यों को प्रयोग में लाए और तुम्हारे विचार से कितने भी क्रूरतम मार्ग अपनाओ तौभी मुझे परमेश्वर के प्रेम से पीछे नहीं हटा सकते हो।"

कठोर रूप में उलेजनाजनक उत्तर के सामने विचलित राज्यपाल उसको कोड़े लगवा कर कारागृह में बन्द कर दिया। लेकिन मार खाने से जो घाव पहुँचे वह सब बहुत शीघ्र सूख गये। जेलर वैद्य को बुलाकर इलाज करने पर वह चंगा होने की शंका में राज्यपाल ने जेलर को भी दण्ड देने की आज्ञा दी। उस समय अन्डोनिक्स इस प्रकार उत्तर दिया: "मैं जिस प्रभु की सेवा करता हूँ वह मुझे चंगा भी कर सकता है।

कुछ दिनों के पश्चात् तीसरी बार भी उन्हें कारागृह से बाहर ले आए। उनके विश्वास प्रति दिन बढ़ते हुए देखकर राज्यपाल ने लोगों को बुलाकर इकट्ठा किया और उन परमेश्वर के भक्तों को मार डालने के लिए मैदान में ले आए। उसके बाद अनेक दिन मुखे रखे जंगली जानवरों को उन के तरफ खोल दिये। अद्भुत कहना चाहिये, एक जानवर भी उन्हें हुआ नहीं। निराश राज्यपाल एक भालू को लाने के लिये आदेश दिया। लेकिन भालू भी उन्हें हुआ नहीं। पराजित राज्यपाल का बैर भाव ज्वलन्द हुआ। उनसे उन मसीही भक्तों के सिरों को उनके शरीर से अलग करने के लिये आदेश दिया। उस प्रकार वे तीनों शूर वीर मसीह के सीने में विश्राम पा लिये।

शिक्षा :

जानने वाली सच्चाई के लिये कोई भी कीमत देने के लिये तैयार हो जाएं। मसीह के लिये सब कुछ सहने के लिये तैयार हो जाएं।

प्रश्न :

१. किलिकी का राज्यपाल कौन था?

२. राज्यपाल को खुश करने के लिये प्रयास किया गया अधिकारी कौन चा?

३. किलिकी में मसीही विश्वास के लिये कष्ट उठाए गये तीन भाई लोग कौन-कौन थे?

४. किस प्रकार तीन मसीही भक्तों को मार डाला गया?

तुम्हें जो करना है :

१. मिशनरियों के जीवनी पढे ।

२. मिशन कार्य के लिये इन शहीदों के समान समर्पित हो जाए। ३. जीवन भी नष्ट हो जाए तो भी यीशु मसीह के लिये ही जीवन बिताए।

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