यीशु सहायता करता है | yeeshu sahaayata karata hai

 यीशु सहायता करता है | yeeshu sahaayata karata hai



"और वे बहुत ही आश्चर्य में होकर कहने लगे, उस ने जो कुछ किया सब अच्छा किया। है, वह बहरों को सुनने की, और गूगों को बोलने की शक्ति देता है। "


अभिप्राय

मसीही लोग अन्य लोगों की आवश्यकताओं में सहायता करने के संबन्ध में बच्चों को सिखाएं।

प्रस्तावना :

मसीह की आत्मा में अन्य लोगों की आवश्यकताओं को समझ कर कार्य की गई एक बहिन की कहानी इस प्रकार है। अस्पताल में एक नर्स दुःखियों की सेवा में लगी हुई थी। उस बहिन ने सेवा के द्वारा वहां के सारे रोगियों को आनन्दित किया। एक बार अस्पताल में भेंट लेने आए एक सम्माननीय व्यक्ति यह जानना चाहा कि यह बहन इतने इमानदारी से अन्य लोगों की सेवा करने का कारण क्या है। उस कमरे के मध्य भाग में एक रस्सी में एक घंटी बान्धकर रखी थी। नर्स उस घंटी की ओर इशारा करते हुए कहा, "जिस रोगी को मेरी आवश्यकता है वह आकर यह घंटी बजाते हैं। तब मैं उन लोगों की सहायता के लिये दौड़ कर पहुंचती हूँ। उस घंटी में इस प्रकार एक आयत लिखा गया है: "गुरु आया है और तुम्हे बुलाता है।" अपने गुरु यीशु के प्रति प्रेम इस स्त्री को दिनरात सब लोगों के लिये निस्वार्थ सेवा के लिये प्रेरित करने वाला मुद्दा रहा। इस स्त्री में जरा भी स्वार्थ नहीं था। विवरण :

हम भी इस बहन के समान स्वार्थरहित रूप में अन्य लोगों की आवश्यकता में सहायता करने के लिये तैयार होना चाहिए। जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे (मत्ती २०:२८ ) । यीशु हमेशा यह सोचता था कि अन्य लोगों के लिये क्या किया जाए।

आत्मिक आवश्यकताओं में सहायता करने वाला यीशु

कई प्रकार की सेवा कर के यीशु आया और थोड़ा सा विश्राम आवश्यक होने पर एक ऐसी जगह ढूंढ रहा होगा जो किसी को नहीं मालूम हो। इस प्रकार वह सूर सैदा के सीमावर्ती देश के एक घर में पहुँचा। उस स्थान के पास में रहने वाली एक यूनानी स्त्री ने मालूम किया कि यीशु उस स्थान में आया है। अशुद्ध आत्मा से ग्रसित अपनी बेटी के लिये वह एक छुटकारा चाहती थी। हो सकता है किसी से उसको यह मालूम हुआ हो कि यीशु रोगियों को चंगा करता है और उसकी बेटी को यीशु के द्वारा चंगाई मिलेगी। इस प्रकार वह सहायता पाने के लिये यीशु के पास आई। परन्तु उस स्त्री के प्रश्न का उत्तर यीशु ने दिया तो ऐसा लगेगा कि वह उसके प्रश्न का उत्तर नहीं है। यीशु ने कहा पहले बच्चों को तृप्त होने दो, और कहा बच्चों की रोटी कुत्तों के आगे डालना उचित नहीं है। यहां बच्चों का तात्पर्य है इस्त्राएल और कुत्तों का तात्पर्य है अन्यजाती। यहूदी लोगों को अन्यजातियों से घृणा थी। यीशु मसीह को यहूदियों के समान यूनानियों के प्रति कोई ऐसा विरोधी विचार नहीं था। यीशु मसीह संपूर्ण मानवजाति के लिये सेवा किए थे। हो सकता है यीशु मसीह उसके विश्वास की परीक्षा कर रहा हो। वह अपना विश्वास अपने जवाब के द्वारा प्रकट की, "उसने उस को उत्तर दिया; कि सच है प्रभुः तौभी कुत्ते भी तो मेज के नीचे बालकों की रोटी का चूर चार खा लेते है।" यीशु उस पर कोई रूचि नहीं दर्शाने पर भी वह सहायता के लिये यीशु की ओर देखती रही। यीशु ने उस माता के को देखा। उसकी बेटी को चंगा किया। उस बच्ची के ऊपर से दुःख दुष्टात्मा को निकाल दिया। चंगाई ही नहीं उस से बढ़कर उनके आत्मिक आवश्यकता को यीशु ने यहां पूरा किया।

यहां ध्यान दो, अपनी बेटी को चंगा करने के लिये वह मां बहुत दूर तक गई। इस प्रकार परस्पर आवश्यकताओं में सहायता करने के लिये एक परिवार के सदस्य तैयार हों तो निश्चित रूप में प्रार्थना द्वारा अन्य लोगों की सहायता करने का एक अच्छा मार्ग है।

भौतिक आवश्यकताओं में सहायता करने वाला यीशु

स्त्री की बेटी को चंगा करने के उपरान्त यीशु यात्रा करके गलील सागर के तट पर पहुँचा। लोगों ने एक बहिरे को जो हकला भी था, उस के पास ले आया। हो सकता है उसके मित्रों ने उसको यीशु के पास लाया होगा। वे लोग शायद बहिरा और हकलाने वाले की सहायता के लिये यीशु के पास आकर विनती की होगी। यीशु ने उसी भीड़ के बीच में दूर ले जाकर उसके कान में उंगलियां डालीं और थूककर उसके जीभ को छुआ। यीशु ने उसकी मान्यता की कद्र कर के उस मनुष्य का सम्मान किया। यीशु उस मनुष्य की भावना को समझकर अद्भुत तरीके से उस को चंगा कर दिया। यीशु उस मनुष्य की सहायता करने की ओर ही ध्यान नहीं देता है अपितु उसके मित्रों ने अपने मित्र की आवश्यकता में सहायता करने की बात पर भी ध्यान दे सकता है।

जीवन में कई समस्याओं के बीच में से होकर जाने वाले लोगों के बीच में हम भी जाएं। उनके दुःखों में सहभागी हो जाएँ। यीशु संसार में आने का उद्देश्य अद्भुत काम करने के लिये नहीं था। सब पापियों को छुड़ाने के लिये है। अनेक लोग अभी भी सुसमाचार सुनने के लिये है इस कारण हम खामोश न रहें। प्रतिदिन के जीवन में प्रभु हमारी मदद करने वाला है। हम परमेश्वर के आर्शीवाद के जरिया बनने के साथ साथ हमारी सेवा परमेश्वर के लिये महिमा प्रदान करने वाली हो।

शिक्षा :

हम हमारी सेवा में अन्य लोगों पर ध्यान रखने वाले और सहायता करने वाले हो जाएं।

प्रश्न

१. यीशु ने किस किस को चंगा किया?

२. हकलाने वाले मनुष्य को यीशु ने किस प्रकार चंगा किया था?

तुम्हें जो करना है :

१. तुम्हारे परिवार या कलीसिया के सदस्यों के भौतिक आवश्यकताओं में उनकी सहायता करें। तुम्हारे प्रेमपूर्वक प्रार्थना और कार्य अन्य लोगों की आवश्यकताओं में मदद करने में सहायक होगा।

२. रोगियों से भेंट करें और प्रेमपूर्वक उन की सेवा शुरू करें।

३. अपने प्रेम करने वालों में कोई मृत्यु को पाए या नष्ट हो जाए तो अलगाव के दुःख अनुभव करने वालों पर दया करें और उन्हें प्रेम करे ।

४. अन्य लोगों को प्रोत्साहित करें। फोन करके उन की आवश्यकताओं को मालूम करें और उन के लिये प्रार्थना करें।

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