शोमा | The bible story

 शोमा



यूहन्ना २०:३१ “परन्तु यह इसलिये लिखे गये हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ।"

अभिप्राय

क्या आप लोग सब बातें जो सब लोग कहते हैं वह अन्धे होकर विश्वास करते हो? कुछ बातें परखकर ही विश्वास कर सकते हैं। इसी प्रकार सब बातें देखकर ही विश्वास करने वाले एक शिष्य के बारे में आज हम अध्ययन करने जा रहे हैं।

प्रस्तावना :

क्या तुम लोग जानते हो कि भारत में सबसे पहले सुसमाचार लानेवाला व्यक्ति थोमा था। थोमा भारत का प्रेरित कहलाता है। प्रेरितों में बहुत अधिक विवादित व्यक्ति थोमा था ।

दिदिमुस नाम थोमा

धोमा १२ शिष्यों में से एक होने के अलावा उस के बुलाहट के बारे में या अन्य बातों के संबन्ध में बाइबल के अन्दर कोई वर्णन नहीं है। पहले तीन सुसमाचारों में थोमा के बारे में कुछ भी नहीं बताया है। लेकिन यूहन्ना द्वारा लिखे गये सुसमाचार से थोमा के बारे में कुछ बातें समझ सकते हैं। थोमा नाम के साथ दिदिमुस नाम भी उपयोग किया गया है। दोनों नाम का अर्थ जुड़वा जन्म लिया है। थोमा इब्रानी नाम और दिदिमुस उसी अर्थ का आनेवाला यूनानी नाम है। अविश्वासी थोमा

यीशु के पुनरुत्थान के दिन यीशु यह कह कर कि “तुम्हें शान्ति मिले,” अपने चेलों को प्रकट हुआ। लेकिन इस समय थोमा वहां नहीं था। पुनर्जीवित यीशु मसीह के बारे में अन्य शिष्य थोमा को बताया पर वह विश्वास करने के लिये तैयार नहीं हुआ। थोमा ने उन से कहा कि जब तक मैं उसके हाथों में कीलों का निशान न देखूं और उसके पंजर में अपनी उंगली न डालूं में विश्वास नहीं करूंगा। फिर आठ दिन बाद वे एक साथ जमा थे कि यीशु आकर उनके बीच में खड़े होकर कहा "तुम्हें शान्ति हो”। फिर थोमा से कहा कि तुम अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देखो। तुम्हारा हाथ बढ़ाकर मेरे पन्जर में डालो। अविश्वासी नहीं विश्वासी हो।

प्रेरित थोमा भारत में

प्रेरित थोमा के कार्यों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। थोमा के संबन्ध में जो पारंपरिक बात है उसमें यह अनुमान लगाते हैं कि वह पारथ्य में और भारत में सुसमाचार सुनाए और कलीसियाएं स्थापित की। AD52 में प्रेरित थोमा केरल में आकर कलीसियाएं स्थापित की और अन्त में तमिलनाडू के मैलापूर में शहीद हो जाने के संबन्ध में परंपरा कहती है।

शिक्षा :

सुने हुए ज्ञान से बढ़कर सीधे देखकर और आज्ञापालन के साथ जो विश्वास है वह श्रेष्ठ और बड़ा विश्वास है।

प्रश्न :

१. थोमा कैसा शिष्य था ?

२. थोमा का भारत आया हुआ वर्ष?

३. आज की शिक्षा क्या है?

तुम्हें जो करना है :

१. थोमा के भारत में भेंट के संबन्ध में ऐतिहासिक प्रमाण जमा किया जाए।

२. थोमा के समान अविश्वासी नहीं बल्कि विश्वास करने के लिये अन्य लोगों को प्रेरित करें।

३. यीशु के बारे में अन्य लोगों के समक्ष गवाही दी जाए।

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