यहूदा इस्करियोती | The bible story

 

यहूदा इस्करियोती


प्रस्तावना :

यीशु मसीह को बेचनेवाले यीशु के शिष्य का नाम क्या है आप लोग जानते हो। (यहूदा) यहूदा क्यों यीशु मसीह को बेच डाला । क्या ३० चांदी के टुकड़े के लिये नहीं था? यहूदा के समान रुपये के लिये और इस संसार के तात्कालीन लाभ के लिए कार्य न करें।

यहूदा इस्करियोती

१२ शिष्यों में यहूदा सबसे अधिक लोगों का ध्यान आकर्षित किया हुआ व्यक्ति था। यहूदा इस्करियोती भयानक अन्त को पाया हुआ और संसार के सभी मनुष्य द्वारा घृणा करने वाला व्यक्ति था। यहूदा इस्करियोती कैरियोत गाँव का निवासी था। पिता का नाम शिमोन इस्करियोती। यहूदा शब्द का अर्थ स्तुति है। यहूदा शिष्यों के बीच में खजांची था।

यहूदा की बुलाहट

जिस प्रकार पतरस और जब्दी के पुत्रों को बुलाया इसी यहूदा इस्करियोती को बुलाने संबन्धी कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन यहूदा को भी शिष्यों में शामिल किया जाना भविष्यवाणी की पूर्ति है। इतना ही नहीं यहूदा एक अच्छा मनुष्य था। यहूदा की योग्यता को यीशु मसीह ने देख लिया था। वह प्रेरितों के झुण्ड में खजांची बनने लायक योग्यता रखता था। यीशु ने अपने प्रेरितों को सुसमाचार सुनाने भेजा था तो यहूदा उनके साथ शामिल था। भी

मसीह को बेचने वाला यहूदा

यहूदा द्वारा यीशु मसीह को बेचे जाने के संबन्ध में यीशु मसीह ने पहले से कहा था। उसके द्वारा यीशु को बेचे जाने की जानकारी यीशु को मालूम होने के संबन्ध में यहूदा जानने के बाद भी वह अवसर मिलने तक यीशु के साथ साथ रहा और अन्तिम भोज में भी शामिल हुआ। यहूदा यीशु मसीह को दिखाने के लिये अवसर ढूंढता रहा। प्रभु और शिष्य अन्त में गतसमनी के बाग में जाते समय यीशु को दिखाने के लिये यहूदा सिपाहियों और यहूदी पूरणियों द्वारा भेजे गये सेना को लेकर मशालों और हथियारों के साथ वहां पहुँचे। पहले से सिपाहियों को समझाया था कि जिस को वह चुम्बन करे वही यीशु है और उसे तुरन्त गिरफ्तार कर लो वह पास जाकर यीशु को चुम्बन किया और कहा रब्बी नमस्कार। तब सिपाही लोग पास जाकर यीशु को गिरफ्तार किये। ३० चांदी के टुकड़ों में यहूदा ने यीशु को बेचा था। यहूदा का अन्त

यीशू को ले जाकर न्याय करने, सताने, परिहास करते और रूस पर चढ़ाते देखकर यहूदा को उसके द्वारा किये गये पाप के बारे में दुःख हुआ। वह जो ३० चान्दी का सिक्का महायाजकों के पास ले जाकर यह कहकर वह चांन्दी के सिक्के मन्दिर के अन्दर फेंक दिया कि मैंने निर्दोष लहू को बेच डाला और फांसी लगाकर मर गया।

शिक्षा :

यहूदा के जीवन से हमें यह सीखना है कि हम मसीह के लिये कुछ किए या नहीं किए पर हम मसीह को बेचने वाले न बने। 

प्रश्न :

१. यहूदा किस देश का था?

२. उसको शिष्यों के बीच में क्या जिम्मेदारी थी?

३. यीशु मसीह को कितने चांदी के सिक्के में बेचा था ?

४. यीशु को बेचने के पश्चात् यहूदा ने क्या किया?

तुम्हें जो करना है :

१. यहूदा के समान किसी को बेचे नहीं न धोखा दें। यह पाप जानकर जीवन बिताएं।

२. रुपया या प्रतिफल चाहते हुए जीवन न बिताएं। यह हमें परमेश्वर की आशीषों से वंचित रखेगा।

३. तुम लोग परिवार और स्कूल जीवन में सच्चे और विश्वासयोग्य रहें।।

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