राई का दाना | The bible story

 राई का दाना



छोटे आरंभ से विशालता की ओर स्वर्ग राज्य की बढ़ती के संबन्ध में उस में बच्चों का हिस्सा समझाने के लिये।

प्रस्तावना :

क्या तुम लोगों ने राई का दाना देखा है? वह हम किस काम के लिये उपयोग करते हैं। तेल उत्पादित करने एवं तरकारी तैयार करने के लिये है न? लेकिन यीशु इसके संबन्ध में बाइबल के अन्दर दृष्टान्त बताया है। वह आज हम अध्ययन करने जा रहे हैं।

विवरण :

बड़ी उपलब्धियां, बड़े शहर, बड़े बड़े अनुसन्धान, बड़ी संपत्ति, बड़ी बड़ी उपाधियां इन सब बातों के संबन्ध में हम लोग गर्व करते और बड़ी बड़ी बातें बोला करते हैं। लेकिन किसी भी बड़ी घटना की शुरूआत बहुत ही छोटे रूप से हुआ करता है। मरकुस - ४:३०-३२ तक परमेश्वर के राज्य को किस से तुलना करें? वह राई के दाने तुल्य है। उस को मिट्टी में बोते हैं जो पृथ्वी के सब बीज से सबसे छोटा है। तीनों सुसमाचारों में वर्णन किये गये इस दृष्टांन्त में परमेश्वर के राज्य के अद्भुत बढ़ती के संबन्ध में प्रतिपादित किया गया है। यीशु मसीह अपने अनन्त जीवन की ओर मार्ग के बारे में अपने आस-पास के लोगों को दर्शाया तो उस समय के बुद्धिमान फरीसी, तर्कसंगत सदूकी इसकी कल्पना भी नहीं की कि वह इस तरह फैल जायेगा।

रोमी साम्राज्य की सीमा में पाए जाने वाले एक छोटे से राज्य में भौतिक अधिकार के बिना हथियार की शक्ति के बिना जीवन बितानेवाले जनसमूह में साधारण व्यक्तियों में से एक बढ़ई के बेटे के रूप में बड़े होकर अपने आस-पास के क्षेत्र में जीवन बिताया हुआ एक गाँव वाला। परन्तु राई के दाने के रूप में सामान्य दिखाई देने वाला मनुष्य बाद में लम्बे समय तक की पीढ़ियों में और सदियों में प्रभाव डालने वाला एक वास्तविकता, विभिन्न संस्कृतियों को रूपान्तरित कर संसार भर के बुद्धि जीवियों को विचारों के लिये मजबूर करने वाला एक चमत्कार साबित हुआ। इस प्रकार क्यों हुआ ? राई के दाने का बीज बहुत ही छोटा है पर वह भी एक बीज है। स्वयं बढ़ने की सक्षमता उसमें भी निहित है। क्रमानुसार बढ़कर बड़े होकर शक्ति और बल प्राप्त करके एक बड़ा पेड़ बन जाता है। यीशु के वचनों में आन्तरिक शक्ति है। ३½ साल तक यीशु द्वारा बोया गया बीज राई के दाने के बराबर छोटा होने पर भी आज वह फैलकर एक बड़ा वृक्ष बन गया है। इसका कारण लगाने वाला और सींचने वाला नहीं बल्कि परमेश्वर इसके पीछे कार्य करता है जो बढ़ाने वाला है।

समूह में बड़े स्थान मान न रखने वाले, अनपढ़ लोगों से जो प्रतिदिन की मजदूरी से जीवन यापन करनेवाले १२ साधारण मनुष्यों के द्वारा यीशु अपना सन्देश प्रसारित किया था। इस कारण हम भी यीशु के शिष्य और परमेश्वर की सन्तान और स्वर्गराज्य के वारिस बन गये। इसका प्रचार-प्रसार सारे शिष्यों का दाइत्व है। परमेश्वर ने सब मनुष्या को योग्यता दी है। परमेश्वर हमसे चाहता है कि हम हमारी योग्यताओं को (तोड़ों का दृष्टान्त) परमेश्वर के राज्य की बढ़ती के लिये उपयोग करें।

उच्च कोटि के कई बातें छोटे से आरंभ से शुरूवात की गई थी। हम कमज़ोर होने पर भी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में समर्पित करें तो स्वर्ग राज्य के निर्माण कार्य के उच्च स्थान में पहुँचाने में प्रभु सक्षम है।

शिक्षा :

जो कुछ सामान्य दिखाई देता है वह परमेश्वर के लिये बड़ा है। तुम्हारी स्थिति परमेश्वर से कहा करें। परमेश्वर तुम्हें अपनी भलाईयों से भर देगा।

प्रश्न :

१. इस दृष्टान्त में स्वर्गराज्य को किस चीज़ के साथ तुलना की गई है?

२. कौन सुसमाचार प्रचार करे?

३. परमेश्वर हम से क्या चाहता है?

४. तुम लोग किस प्रकार अपने आसपास स्वर्गराज्य की बढ़ती के लिये। उपयोग में आ सकते हो?

तुम्हें जो करना है:

१. तुम लोग जितना हो सके सुसमाचार के लिये कार्य करें। पर्चे, किताबें आदि देकर कार्य करें।

२. प्रति दिन समय अलग करके आत्माओं के लिये प्रार्थना किया करें।

३. बाइबल से दृष्टान्तों को पढ़ते रहें।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ