जंगली पौधे

 जंगली पौधे


अभिप्राय

परमेश्वर का वचन सुनकर अच्छे फलों को उत्पन्न कर परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन बिताने वाले, अन्तिम समय में स्वर्ग राज्य के अधिकारी होंगे और अन्य लोगों को जंगली पौधे के समान अलग करके आग में झोंके जाने के संबन्ध में समझने के लिये।

प्रस्तावना :

क्या तुम लोगों ने उन खेतों को देखा है जिस में चावल के पौधे खड़े हैं? कितना अच्छा दिखता है न? लेकिन वे पूरे चावल के ही पौधे नहीं हैं। उनके बीच में चावल के ही पीधे के समान अन्य पौधे बढ़ते हैं। इनको जंगली पौधे कहते हैं। यीशु ने इन पौधों के बारे में कहा है। उसके संबन्ध में हम अध्ययन करने जा रहे हैं। 

विवरण :

गेहूं के बीच में जंगली पौधों के संबन्ध में केवल मत्ती रक्ति सुसमाचार में ही लिखा गया है। इस दृष्टान्त में स्वर्ग राज्य की एक मनुष्य अपने खेत में अच्छे बीज बोने की ओर तुलना किया गया है। लेकिन अच्छे बीज बोने के पश्चात् शत्रु ने जाकर जंगली बीज बोने के बारे में और गेहूं के साथ साथ जंगली पौधे भी बढ़ने का दृष्टान्त यीशु मसीह द्वारा व्यक्त किया गया है। शत्रुओं को मालूम था कि किसान अच्छे फसल प्राप्ति के लिये अच्छा बीज बोया है। उसको रोकने के लिये शत्रु अच्छे बीज के बीच में जंगली बीज को बो दिया। कभी-कभी इन जंगली पौधों को पहचानना भी मुश्किल होता है। देखने में दोनों एक समान दिखते हैं।

फूल और फल आने पर ही गेहूं और जंगली पौधों का अन्तर पहचान में आता है। फल के द्वारा पहचाने जाते हैं। अच्छा पेड़ अच्छा फल और बुरा पेड़ बुरा फल प्रकट करता है। इन जंगली पौधों को निकालने के लिये कोशिश करें तो जंगली पौधों के साथ साथ अच्छे पेड़ भी निश्चित रूप से नाश हो जायेंगे। इस कारण इस दृष्टांत के स्वामी सेवक लोगों के बुराई रूपी प्रक्रिया को बुराई ही देखकर जंगली पौधों को उखाड़ने की अनुमति लेने पर भी नहीं माना। स्वामी अपने गेहूं के पौधों के संबन्ध में उतना ध्यान रखनेवाला है। इस कारण कहा था कि दोनों को कटनी तक बढ़ने दो।

संसार में दिखाई देने वाली बुराई को संपूर्ण रूप में नाश नहीं किया जा सकता परन्तु बुराई की प्रक्रिया को बुरा ही देखकर एक एक व्यक्ति बुराई को पहचानकर उस पर जय प्राप्त करें। बुराईयों के हम गुलाम न बनें। बुराई भलाई का एक मिश्रण है कलीसिया। पहली सदी की कलीसिया में भी आरंभ से ही बुराई की शक्ति पवित्रता के साथ बढ़ती रही। आत्मा के द्वारा पवित्र जीवन बिताने वाले और कपट मेषधारी भी उनमें पाये जाते थे। इस प्रकार की बुराईयों को लमा के द्वारा सामना करें। एकाएक उसको नष्ट करने के लिये कोशिश करें तो अच्छे लोगों का विश्वास भी नष्ट हो सकता है। कटनी तक उनको एक साथ बढ़ने दो। हम में पाई जानेवाली बुराई के साथ हम कभी समझौते के लिये तैयार न हों। बुराई को पराजय करने के लिये हम बुलाए गये हैं। हमारा संपूर्ण जीवन उस के लिये एक संघर्ष होना चाहिए। 

अन्य लोगों को जंगली घोषित करने और उनका न्याय करने के लिये हमें हक नहीं है। लेकिन हमारे बारे में यह न्याय करने के लिये कि हम कहीं जंगली पौधा तो नहीं और हमारे हृदय के जंगली पौधों को संपूर्ण रूप से नष्ट करने के लिये हमें उत्तरदायित्व है।

प्रत्येक व्यक्ति शरीर में रहकर भले और बुरे कार्य किये हैं उसका ठीक ठीक फल पाने के लिये हम सबको मसीह के न्यायासन के सामने उपस्थित होना पड़ेगा। इसलिये स्वामी के लिये अच्छा फल प्रदान करने हेतु और उससे अच्छे प्रतिफल पाने के लिये हमारे जीवन से सब जंगली पौधों को निकालकर हम एक स्वच्छ जीवन बिताएं। 

शिक्षा :

अपवित्रता का पीछा न कर के अलगाई का जीवन बिताएं। हम सदा जागते और प्रार्थना करते रहें ताकि शत्रु हमारे अन्दर जंगली बीज नबोने पाए।

प्रश्न :

१. जंगली पौधे का दृष्टान्त कौन कौन से सुसमाचार में वर्णन किया गया है? 

२. जंगली पौधों के दृष्टान्त द्वारा तुम्हें कौन सी सीख मिली है?

तुम्हें जो करना है :

१. विश्वास की सत्यता के लिये त्याग को करते हुए स्थिर रहें। २. बुराई को देखकर उससे परे रहें। अच्छी बातों को स्वीकार करें। ३. अपने सहपाठियों के साथ अच्छा संबन्ध रखें। अच्छे लोगों के साथ संबन्ध स्थापित करें।

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